Free Sunderkand PDF Download In Hindi 2023

Free Sunderkand PDF Download In Hindi 2023

sunderkand pdf

About Sunderkand:

The Sunderkand is a sacred chapter from the epic Ramayana that holds immense significance for devotees of Lord Rama. If you’re seeking a convenient way to access and read the Sunderkand in Hindi, look no further! In this article, we will guide you on how to download the Sunderkand PDF in Hindi, providing you with a valuable resource to delve into the divine verses of this spiritual masterpiece.

The Ramayana, an ancient Indian epic, narrates the divine journey of Lord Rama, the seventh avatar of Lord Vishnu. It consists of seven books, each carrying its own unique essence. Among them, the Sunderkand holds a special place, as it portrays the heroic deeds of Hanuman and his encounter with Mother Sita in Lanka. Devotees of Lord Rama often seek to read and recite the Sunderkand as it is believed to bring immense blessings and spiritual upliftment. To make it easily accessible, the Sunderkand PDF in Hindi provides a valuable resource for devotees to immerse themselves in the profound teachings and stories of this sacred text.

Sunderkand In Hindi PDF Download

  1. Easy Accessibility: By downloading the Sunderkand PDF in Hindi, you can conveniently access this spiritual text anytime, anywhere, on your preferred device. Whether you are at home, traveling, or attending religious gatherings, you can delve into the divine verses with ease.
  2. Preservation of Tradition: The Sunderkand holds a significant place in Hindu culture and traditions. By downloading the Sunderkand PDF, you contribute to preserving and propagating this sacred text for future generations. It allows individuals to maintain a connection with their cultural and spiritual heritage.
  3. Deepening Spiritual Practice: Reading the Sunderkand in Hindi enables devotees to deepen their spiritual practice and strengthen their devotion towards Lord Rama. By immersing themselves in the divine words of the Sunderkand, they can experience a sense of peace, joy, and spiritual fulfillment.

Sunderkand PDF Overview

PDF File nameSunderkand In Hindi.pdf
No. Of Pages30
File Size231KB
CategoryReligious
LanguageHindi
SourceMultiple Sources

Download Sunderkand In Hindi PDF Version

The Sunderkand is a revered chapter from the epic Ramayana that holds deep spiritual significance for devotees of Lord Rama. By downloading the Sunderkand PDF in Hindi, you gain easy access to this divine text and the opportunity to explore its teachings and stories. Ensure you download the PDF from reliable sources to ensure accuracy and authenticity. Immerse yourself in the verses of the Sunderkand and experience the divine blessings and spiritual upliftment it offers.

Sunderkand Lyrics In Hindi

।। श्लोक ।।

शान्तं शाश्वतमप्रमयमघं नराणांशान्तान्तप्रदं
ब्रह्माशम्भुफनिन्द्रसेव्यमननाशं रेदन्तरेद्यं नर्भुम्।।
रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरं मायामनुष्यं हर्रं
र्नदेऽहं करणकरं रघुरं भूपालचूड़ामनम्।।
नान्या सृहा रघुपतेहृदयेऽस्मदये
सत्यं रदानं च भ्रमन्तिलान्तरात्मा।।
भन्ततं प्रयच्छ रघुपुङ्गर नानाभारं मे
कामान्ददोषेरनहतं कु र मानसं च।।
अतुलत्बलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजर्नकृ शानुं ज्ञाननामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनन्दनं राराणामपिशाचं
रघुपनतनप्रयभतं रतजातं नमनम्।।

।। चौपाई ।।

जमर्नत के बचन सुहाए। सुनन हनुमंत हृदय अनत भाए।।
तब लंग मोन्ह पररिहु तुम्ह भाई। सनह दु कं द मूल फल आई।।
जब लंग अर सिततनह देइ। होइनह काजुमोनह हर्ष नबकेशी।।
यह कान्ह नै सबन्ति कहुँमाथा। चलेउ हरणष नहयुन्धरर रघुनाथा।।
नसंधुतीर एक भूधर सुंदर। क तुक कू नद चढ़ेऊ ता ऊपर।।
बार बार रघुबीर सुँभारी। तर्के उ पर्णतनय बल भारी।।
जेन्हं नगरर चरण देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
नजनम अमोघ रघुपनत कर बाना। एहि भौंनत चलेउ हनुमाना।।
ज्वलनन्ध रघुपनत दू त नबचारी। तंनमनक होनह श्रमहारी।।
दोहा: हनुमान तेन्ह परसा करपुन्न की प्रणाम।
राम काजुकिएनबनुमोन्ह कहाउन्नबश्रम।।

।। चौपाई ।।

जात पर्णसुत लती देइया। जाननकुँबल बुन्ति नबसेषा।।
सुरसा नाम अनहि कै माता। पथिन्ति आइ कहि तेनहं बाता।।
आजुसुरी मोनह दी अहारा। सुनत बचन कह परनकु मारा।।
राम काजुकरर नफ़रर मनर । सीता कै सुन्ध प्रभुनाह सुनार ।।
तब तरबन्द पणथौउँई। सत्य कहुँमोन्ह जन देमै।।
कबनेहुँजतन देइ नानहं जाण। ग्रासनस न मोनः कहेउ हनुमाना।।
जोजं भर्र तेनहं बदनुपसारा। कनप तनुकी दुगुन नबस्तारा।।
सोरह जोजं मुई तेनहं ठयौ। तुरत पर्णसुत बनिस भयौ।।
जस जस सुरसा बदानुबढारा। तसुदु न कनप रूप दियरा।।
सत् जोजन तेन्हं सहायक कीया। अनत लघुरूप पर्णसुत लीया।।
बदन पिनठ पुन्नन बाहेर आरा। मागा नबदा तनह नसर नारा।।
मोनह सुरि जेनेह लंग व्यारा। बुध बल मर्मुतोर मर्चेंट।।
दोहा: राम काजुसुकररहहु तुम्ह बल बुन्दि नन्दन।
अनासष देहगइ सो हरणष चलेउ हनुमान्।।

।। चौपाई ।।

नन्नश्चरर एक नसंधुमहुनरहै। कर्र मया नभुके इग गहै।।
जीर जंतुजेगगन उड़हीं। जल नबलोनोक नति कै पररछाहें।।
गहि चहुँसक सो न उउई। एनह नबंध सदा गगनचर आई।।
सोइ छल हनुमान कहौंकिया। तासुकपटुकनप तुरतनहं चिआ।।
तनह मारर मरसुत बीरा। बरंध पार गयौ मनतधीरा।।
तहौँजाइ देइ बन सोभा। गुंजत चांचरीक मधुलोभ:।।
नाना तर फल फू ल सुहाए। इग मृग बृंद दंत्ति मन भाए।।
सैल नबसाल दांती एक आगे। ता पर धाइ चढेउ भय त्यागें।।
उमा न कचुकनप कै अनधकाई। प्रभुप्रताप जो कलनह आई।।
नगरर पर चनढ लंका तेनहं देिी । कनह न जाइ अनत दुगानबसेषी ।।
अनत उतंग जलनननध चहु पासा । कनक कोट कर परम प्रकासा ।।

।। छं द ।।

कनक कोट नबनचत्र मनन कृ सुंदर तैयताना घना।।
चुहट्टा हत्त सुबत्त बीठिनचार पुर बहु नबंध बना।।
गज बणज इच्छर नानकर पदचर रथ बरुंती को गनै।।
बहुरूप नन्नसचर जूथ अनतबल सेन बरनत नन्हं बनै।।
बन बाग उपबन बांटका सर कू प बपींसोहहिं।।
नर नाग सुरगन्धबाकन्या रूप मुन्न मन मोहहिं।।
कहुँमल देह नबसाल साले समान अनतबल गज़हिं।।
नाना अइरेइ नभरनहं बहु नबंध एकी तजाहिं।।
करर जतन भत कोनति नबकत तन नगर चहुँनदंस रच्छहिं।।
कहुँमनहष मनशुधेनुइर अज इल नैनसाचर भच्छहिं।।
एनह लंग तुलसीदास इ की कथा कपालक हैकही।।
रघुबीर सर तीरथ सरिरन्ति त्यांग गणत पहनहं सही।।
दोहा: पुर रिरारेडेन्ति बहु कनप मन की नचार।
अनत लघुरूप धार नन्नस नगर कर इम्पीसार।।

।। चौपाई ।।

मास्क समान रूप कनप धरी। लंकान्ह चलेऊ सुनमरर नरहरि।।
नाम लंकनी एक नन्नसचरी। सो कहलेनस मोनह नंदरी।।
जनेन्ह नहिमरमुसठ मोरा। मोर आहार झाउलंग खोरा।।
मुन्थका एक महा कनप हनी। रणधर बमत् धरनीन्धनमनि।।
पुन्न संभरर उंठ सो लंका। जोर पानन कर नबनय सांसका।।
जब रर्णनः ब्रह्म बर दीया। चलत नबरन्नच कहा मोनह चिया।।
नबकल होनस तनकनप केनमारे। तब जानेसुनन्नसचर संघारे।।
तात मोर अनत पुण्य बहुता। देइउँनयन राम कर दूं ता।।
दोहा: तत् स्वगापबगासुइ धररा तुला एक अंग।
तुल न तनह सकल नमनल जो सुइ लार सतसंग ।।4।।

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